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Saturday, September 24, 2005
'दलित महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाया गया'
उड़ीसा की पुलिस ने 29 लोगों की तलाश में एक अभियान छेड़ा है जिन पर आरोप हैं कि उन्होंने कुछ महिलाओं को ज़बर्दस्ती नंगा करके घुमाया था.
यह घटना उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर से 70 किलोमीटर दूर स्थित भुबनपति गाँव में हुई.
आरोप हैं कि गाँव में उच्च जाति के लोगों ने छह पिछड़ी जाति की महिलाओं को बाल पकड़ कर घसीटा और उन्हें नंगा करके घुमाया.
बताया गया है कि ये महिलाएँ नाई जाति से हैं और उनका क़सूर इतना भर था कि गाँव की एक शादी में उनके पतियों ने अतिथियों के पाँव धोने से इनकार कर दिया था.
इस घटना की शिकार तिलोत्तमा बारिक ने बताया, "मुझे घर से घसीटकर निकाला गया. मेरे साथ मारपीट की गई और नंगा कर घुमाया गया."
इस घटना के बाद गाँव के दलित महिलाएँ और बच्चे डर के कारण घर छोड़कर भाग गए.
इन लोगों को गुरुवार को राजधानी भुवनेश्वर लाया गया और इसमें शोषित लोगों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाले संगठन अंबेडकर लोहिया विचार मंच ने प्रमुख भूमिका निभाई.
मंच की महासचिव ममता बेहरा का कहना है, हमें केवल आश्वासन ही हाथ लगे हैं.''
एक अन्य नेता रवींद्र बेहरा का कहना था कि प्रशासन घटना को कितनी गंभीरता से लेता है उसका पता इस बात से चलता है कि अभी तक कोई गिरफ़्तारी नहीं हुई है.
ब्रह्मगिरी पुलिस स्टेशन के प्रभारी दिलीप कुमार त्रिपाठी का कहना था कि इस मामले में जिन 29 लोगों के ख़िलाफ़ शिकायत की गई है, उनकी तलाश में अभियान छेड़ा गया है.
लेकिन उन्होंने इस घटना में यौन उत्पीड़न की बात से इनकार किया.
इस इलाक़े में पिछड़ी जाति के लोगों के उच्च जाति के लोगों के पैर धोने से मना करने के बाद से कुछ समय से तनाव है. पहले भी पिछड़े समुदाय के लोगों पर कई हमले हो चुके हैं.
कुछ महीने पहले हुए हमले में एक शख्स मारा गया था और अनेक लोग घायल हो गए थे.
यहाँ तक कि उनका सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया था और उन्हें पानी लेने पर भी पाबंदी लगा दी गई थी.
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