Showing posts with label Indian Christian council. Show all posts
Showing posts with label Indian Christian council. Show all posts

Saturday, October 14, 2006

सैंकड़ों दलितों ने बौद्ध और ईसाई धर्म को अपना लिया

भारत के सैंकड़ों दलितों ने हिंदू वर्णव्यवस्था और धर्मांतरण विरोधी क़ानूनों का विरोध करते हुए बौद्ध और ईसाई धर्म को अपना लिया है.


भारतीय संविधान के निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले दलित नेता भीमराव अंबेडकर के बौद्ध धर्म अपनाने के 50 साल पूरे होने के मौके पर नागपुर में धर्मांतरण समारोह आयोजित किया गया.
आयोजकों का कहना है कि वे भारत के अन्य शहरों में भी इस तरह के धर्मांतरण समारोहों का आयोजन करेंगे।


धर्मांतरण
ऑल इंडिया क्रिश्चियन काउंसिल के एल्बर्ट लायल ने बीबीसी को बताया कि रैली में छत्तीसगढ़, कर्नाटक, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से हज़ारों लोग पहुँचे।अखिल भारतीय अनुसूचित जाति-जनजाति संगठनों के परिसंघ के नेता उदित राज ने दावा किया कि धर्मांतरण सभा में दो से ढ़ाई हज़ार लोगों ने ईसाई और बौद्ध धर्म को अपना लिया।उन्होंने कहा, "हमनें गुजरात की मोदी सरकार को इसके ज़रिए बताने की कोशिश की है कि ईसाई और बौद्ध धर्म हिंदू धर्म से बेहतर हैं।"


इसका आयोजन ऑल इंडिया क्रिश्चियन काउंसिल और अखिल भारतीय अनुसूचित जाति-जनजाति संगठनों के परिसंघ ने संयुक्त रूप से किया था।एल्बर्ट लायल ने बताया कि नागपुर की रैली में 500 से अधिक लोगों ने ईसाई धर्म को और एक हज़ार से अधिक लोगों ने बौद्ध धर्म को स्वीकार कर लिया.
धर्मांतरण समारोह शुरू होने से पहले ऑल इंडिया क्रिश्चियन काउंसिल के अध्यक्ष जोसेफ़ डिसूजा ने डॉ. अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता का रास्ता दिखाया था.

इस समारोह में अमरीका और ब्रिटेन के 30 से अधिक प्रतिनिधिमंडल ने शिरकत की।आंध्र प्रदेश की राजधानी हैदराबाद में भी दलितों की एक रैली हुई जिसमें कुछ लोगों ने धर्मांतरण किया.
धर्मांतरण पर कड़े क़ानूनी प्रावधानों की पक्षधर भारतीय जनता पार्टी शासित प्रदेशों - मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और गुजरात में अल्पसंख्यकों में धर्मांतरण के विषय पर काफ़ी रोष है।